Major Harbhajan Singh||Hero of Nathula||Real Hero of movie Paltan(hindi audio)

Channel : Hindustan Meri jaan · on 27-06-2020 04:15:35 PM
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मेजर हरभजन सिंह का जन्म 3 अगस्त 1941 को पंजाब में तरनतारन जिले की पट्टी तहसील के ग्राम भट्टे भैनी में हुआ था।
बटवारे से पहले यह लाहौर जिले का हिस्सा था, जो अब पाकिस्तान में है।
उनके पिता S. Assa सिंह एक देशभक्त और स्वतंत्रता सेनानी थे।

अपने गाँव के स्कूल में प्राइमरी स्कूलिंग के बाद, मेजर हरभजन सिंह ने मार्च 1956 में DAV हाई स्कूल, पट्टी से अपना मैट्रिक पूरा किया। जून 1956 में, उन्होंने खुद को सेना भर्ती कार्यालय, अमृतसर में एक लड़के सैनिक के रूप में दाखिला लिया और Corps ऑफ़ सिग्नल में शामिल हो गए।
30 जून 1963 को, उन्हें एक अधिकारी के रूप में नियमित कमीशन दिया गया और उन्हें 14 राजपूत के पद पर नियुक्त किया गया। इन्होने 1965 के भारत-पाक युद्ध भी लड़ा था। बाद में उन्हें राजपूत रेजिमेंट की 18 राजपूत unit में तैनात किया गया।

मेजर हरभजन सिंह 1967 में सिक्किम के नाथुला में तैनात थे उस वक़्त सिक्किम भारत का हिस्सा नहीं था लेकिन भारत के ही संरक्षण में था 1965 से ही चीन सिक्किम पे कब्ज़ा करने की कोशिश में था और वो बार बार लाउडस्पीकर पर भारतीय सैनिको को धमकी देता था की पीछे हट जाओ वरना 1962 वाला हाल करेंगे जिसकी वजह से कई बार भारत और चीन के सैनिको के बिच धका मुक्की होती थी

इस टकराव से बचने के लिए नाथू ला में सिक्किम- चीन सीमा पर एक तार की बाड़ लगाने का फैसला किया। तार की बाड़ को बिछाने का काम 70 field company ke enginears को सौंपा गया था। मेजर हरभजन सिंह नाथू ला में C ए ’कॉय बटालियन के कमांडर थे, जो नाथू ला में तार की बाड़ और बाधा निर्माण करने वाले इंजीनियरों को सुरक्षा प्रदान करने के लिए तैनात थी।
11 सितंबर 1967 को,indian army ke इंजीनियरों ने नाथू ला के north shoulder पर subah 5;40 minute पर तार बाधा के निर्माण की शुरुआत की।

चीनी सेना तार बाधा के विरोध में थी और परिणामस्वरूप, भारतीयों और चीनी सैनिकों के बीच हाथापाई हुई कुछ देर बाद चीनी सेना वापस चली गई और भारतीयों ने तार बिछाना फिर से शुरू किया ।
थोड़ी देर बाद चीनी सेना ने बगैर किसी चेतवानी के एक साथ कई भारतीय मोर्चे पर गोलाबारी की सुरु कर दी । राजपूत कंपनी और इंजीनियरों को खुले में खड़े थे जिसके कारण पहले ही 10 मिनट में 60 सैनिक शहीद हो गए और कई सारे घायल हो गए, तभी मेजर हरभजन सिंह ने मोर्चा संभाला और चीनि sena par MMG गन से हमला करना सुरु किया | तभी मेजर हरभजन सिंह की नज़र एक chinese बंकर पर पड़ी जहां से चीनी सैनिक लाइट मशीनगन से ताबडतोड फायरिंग किये जा रहे थे
मेजर हरभजन सिंह उस मशीनगन को नस्ट करने के लिए आगे बढ़ गए । मेजर हरभजन सिंह ने आगे बढ़ते हुए कई चीनी सैनिकों को मार गिराया और उनकी लाइट मशीनगन को चुप कराने के लिए आगे बढ़ गए और एक granade फेंककर उनकी गन को नष्ट कर दिया । इस प्रक्रिया के दौरान, मेजर हरभजन गंभीर रूप से घायल हो गए और वीरगति ko प्राप्त हो गए।

इस वीरता के लिए , मेजर हरभजन सिंह को "महावीर चक्र" से सम्मानित किया गया।

2018 में आई जे पि दत्ता की फिल्म पल्टन इसी लड़ाई पे आधारित थी जिसमे हर्षवर्धन राणे ने मेजर हरभजन सिंह का किरदार निभाया था।
इनको लेकर एक गलत फेमि भी है दरअसल सिक्किम के ही नाथुला में एक बाबा हरभजन सिंह नाम के सैनिक का मंदिर है जिनकी आत्मा सरहद पे पहरा दे रही हैं कई लोग यह समझ लेते है की यह वही हरभजन सिंह है जो चीनियों से लड़ते हुए सहीद हो गय्ये थे लेकिन ऐसा नहीं है यह दोनों अलग-अलग है
इस तस्वीर में इन दोनों को देखिये इसमें ये साफ़ पता चल रहा है की यह दोनों दो अलग-अलग सख्श है
इन दोनों ये सिमिलॅरिटी है की दोनों का नाम हरभजन सिंह है दोनों पंजाब से है और यह भी सिमिलॅरिटी है की दोनों ही नाथुला में ही सहीद हुए थे
लेकिन यह मेजर हरभजन सिंह 1967 में चीनियों से लड़ते हुए सहीद हुए थे और बाबा हरभजन सिंह 4 अक्टूबर 1968 को खच्चरों का काफिला ले जाते वक्त पूर्वी सिक्किम के नाथू ला पास के पास उनका पांव फिसल गया और घाटी में गिरने से उनकी मृत्यु हो गई थी (इनपर में एक अलग से वीडियो बनाकर पूरी जानकारी दे देऊंगा)